गोंड गांवों में सीढ़ीनुमा खेती की स्वीकृति की कहानी

Parijat Ghosh, Dibyendu Chaudhuri . November 17, 2021

मध्य प्रदेश में सिंगरौली जिले के चटनिहा गांव में दौरे के दौरान, रामकली और मुन्नी ने बताया कि किस तरह जुताई और बारिश के कारण उनकी ज़मीनों की उर्वरकता पर बुरा असर पड़ रहा है। दौरे के बाद की गई बैठक में यही मुद्दा बुधनी, सुग्मन्ति और बिट्टी पनिका जैसे अन्य गांव वालों द्वारा भी उठाया गया।

गांव का दौरा करते समय हमने हर तरफ़ पथरीली बंजर ज़मीनें देखीं। जब हमने बैठक में गांववालों से पूछा, “खेत की मिट्टी कहाँ गई?”, तब हमेशा की तरह मुन्नी अपने मज़ाकिया अंदाज़ में बोली, “मेरे खेत की मिट्टी तो शांति दीदी के पास है”। मुन्नी के खेत पहाड़ी के ऊपर की तरफ़ हैं। उसका परिवार हर साल खेती के लिए अपनी ज़मीन की जुताई करता है, लेकिन बारिश की वजह से पानी के साथ मुन्नी के खेतों की सारी उर्वरक मिट्टी बह कर नीचे घाटी में शांति के खेतों में जमा हो जाती थी।

Pariajt and Dibyendu

Read More

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *


Notice: Undefined variable: sidebar in /var/www/html/sampark/wp-content/themes/iridium/sidebar.php on line 11

Notice: Undefined index: Submit in /var/www/html/sampark/wp-content/themes/iridium/footer.php on line 192